भगत सिंह

By: Richa Vohra & Davinder Singh


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भगत सिंह सत्ताईस सात सितम्बर,खटकर कलां, पंजाब में पैदा हुआ था. वह एक भारतीय क्रांतिकारी था , भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रसिद्ध शहीदों में से एक माना जाता था. इस कारण से, वह अक्सर शहीद भगत सिंह के रूप में संदर्भित किया जाता है. शहीद शब्द का मतलब है मर्त्य्र. भगत सिंह सरदार किशन सिंह और विद्यावती एक बेटा था और एक सिख परिवार में पैदा हुआ था. उनके चाचा, सरदार अजीत और पिता महान स्वतंत्रता सेनानी थे और भगत सिंह एक देशभक्ति के वातावरण में पले.

जब भगत सिंह D.A.V. स्कूल लाहौर में अध्ययन कर रहे थे उन्नीस सौ सोलाह में, युवा भगत सिंह लाला लाजपत राय और रास बिहारी बोस जैसे कुछ प्रसिद्ध राजनीतिक नेताओं के साथ संपर्क में आये . उन्नीस सौ उन्नीस में, जब जलियाँवाला बाग नरसंहार हुआ , भगत सिंह केवल बारा साल का था. नरसंहार ने उसको बहुत परेशान करदिया . नरसंहार के अगले दिन भगत सिंह ने जलियाँवाला बाग और घटनास्थल से एकत्र मिट्टी के को ले लिया और यह अपने जीवन में स्मृति चिन्ह के रूप में रखा. नरसंहार को देकर संकल्प लिया और अपने संकल्प को मजबूत करके ब्रितिशेर्स को भारत से भगा दिया.
महात्मा गांधी ने में ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आन्दोलन शुरू किया. उनके साथ सहयोग करके भगत सिंह ने नेशनल कॉलेज शुरू किया और इस प्रतिक्रिया में, भगत सिंह ने अपना स्कूल छोड़ दिया और लाहौर में खोला नेशनल कॉलेज में शामिल हो गए. यह कॉलेज है, जो क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था, वह भगवती चरण, सुखदेव और दूसरों जैसे क्रांतिकारियों के साथ संपर्क में आया. वह उत्तर प्रदेश के क्रांतिकारियों द्वारा गठित हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का एक सदस्य बन गया.
ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों को आतंकवादियों का नाम देकर बुलाया.भगत सिंह ने जब बात चीत दोबारा समस्या हल नहीं हुई थो हिंसा को अपनाया.बम और बंदूकों का इस्तेमाल किया क्योंकि ब्रिटिश उनके खिलाफ हिंसा बल का प्रयोग कर रहे थे.

भारतीयों के असंतोष का मुख्य कारण खोजने के बजाय, ब्रिटिश सरकार ने नयी बदसूरत उपाय किए.भारतरक्षा अधिनियम.पुलिस को अधिक लोगों को गिरफ्तार करने की शक्ति दे दी. भारत रक्षा अधिनियम का एककानून था जो लागू करने के लिए मजबूर किया गया था. 8,1929 अप्रैल को केन्द्रीय विधान सभा में जहां कानून पारित करने के लिए बैठक का आयोजन किया जा रहा था.भगत सिंह एक बम फेंक दिया.सरकार को संदेश दिया था के वो जो करे हैं वो ठीक नही है. बम ने किसी को चोट नहीं पहुँचाई. बम फेंकने के बाद भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया था. 7 अक्तूबर 1930 को मौत की सजा सुनाई थी और उसको फांसी देदी गयी थी.

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