अगर हम किसी भी गलती की है, तो माफ करना

external image bhindranwale_2011.04.02.jpgसुखवीर - नीना - कुलजीत




  1. संत जरनैल सिंह जी भिंडरांवाले

* प्रारंभिक जीवन


संत जरनैल सिंह जी भिंडरांवाले का जन्म बारह फरवरी ऊनी सौ संताली में हुआ था। उनका जन्म गांव रोड़े में हुआ था, जो के मोगा जिले में है। भिंडरांवाले जी के पिता का नाम जोगिन्दर सिंह बरार था। वह एक किसान था और भिंडरांवाले जी उनसे बहुत प्रभावत थे। उनकी माता का नाम निहाल कौर था। भिंडरांवाले जी की एक बहन थी और सात भाई थे, जिन में से वो सबसे छोटे थे। भिंडरांवाले जी पांच साल के थे जब उन्होंने अमृत पान किया। उन्होंने दमदमी टकसाल से अपनी विद्या प्रपात की। एक साल सिक्खी का कोर्स पूरा करने के बाद, वह फिर से खेती बाड़ी करने लगे। भिंडरांवाले जी कम पड़े थे लेकिन उनकी स्मृति बहुत मज़बूत थी। वह हर रोज़ स्मृति से पाठ किया करते थे।
sant_jarnail_singh_ji_khalsa_bhindranwale_2013.07.01.jpgsant_jarnail_singh_ji_khalsa_bhindranwale_2004.07.02.1.jpgSant-Jarnail-Singh-Bhindranwale (22).jpg

जरनैल सिंह भिंडरावाले की शादी प्रीतम कौर से 1966 में हुई। उनकी दो संताने थे, ईशर सिंह और इंदरजीत सिंघ। ईशर ने कहा था के उसकी पिता राजनीती में नहीं मानते थे । नीती कपट से पैदा होती है जब की धर्म उपदेश से पेड़ो होता है। ह हिंसा में विश्वास नहीं करते थे । उनो ने युवानो को अमृत लेने के लिये प्रोत्साहित किया। उनका उद्देश्य एहि था की सिख धर्म भारत और पूरी दुनिया में प्रसीद हो। ज भी सिख लोग उने याद करते है। वो बहुत प्रेणापद थे।

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*शहीद

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संत जी एक बहुत धार्मिक व्यक्ति थेबहुत से लोगों को संत जी की बारे गलतफहमी थीसंत जी ने कहा हर हिन्दू, एक सच्चे हिंदू होना चाहिए हर मुसलमान एक सच्चे मुसलमान होने चाहिए और इसी तरह हर सिख, एक सच्चे सिख होना चाहिएमार्च उन्नीस तिरासी (1983) में, संत जी ने सिखों और श्री हरमंदिर साहिब पर हमले के बारे में सुनाजब संत जी ने इस बारे में सुना, संत जी बहुत परेशान थाउन्नीस चौरासी (1984) में, यह खबर सच हो गया जब इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को हरमंदिर साहिब और सैंतीस (37) गुरुद्वारे पर हमला करने के लिए कहासैकड़ों लोगों इस युद्ध में मर गय। और उनमें से एक था, संत जरनैल सिंह जी भिंडरांवाले।

लेकिन यह अंत नहीं था। संत जी की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी की मौत हो गई थी।

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