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मंगल पांडे जुलाई १९, १८२७ को उत्तर प्रदेश में पैदा हुए थे. वो अपने माता पिता और बहन के साथ एक गाँव में रहते थे. उनके पिता जी एक किसान थे.वह एक धर्मनिष्ठ हिंदू थे.

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जब वो २२ साल के थे, वो बनई की ३४थ रेगिमेंट में भारतीय हो गए.



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मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग शुरू की क्योंकि के अंग्रेजों ने सारे सिपाही को मजबूर किया प-५३ बन्दूक इस्तेमाल करने के लिए.


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बन्दूक को इस्तेमाल करने के लिए सिपाही को कारतूस को चबाना था मगर कारतूस के उप्पर गाय और सूअर की चर्बी लगी भी थी. वो मुसलमानों और हिन्दुओं के मज़हब के खिलाफ था.

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अँगरेज़ कहते थे के सिपाही कारतूस न चबाने. हिन्दू और मुसलमान सिपाहियोंको ये बात

अच्छी नहीं लगी और मार्च २९ २८५७ को कोल्कता के नज़दीक बर्रच्क्पोरे में मंगल पांडे ने कुछ और सिपाहियों के साथ विद्रोह शुरू की.



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पांडे ने अपने अंग्रेजों हवलदार के उप्पर हमला किया और एक एडजुटेंट को ज़ख़्मी कर दिया. प्रभारी अधिकारी हेअर्सय ने एक जमादार को हुकुम दिया पांडे को गिरफ्तार करने के लिए मगर जमादार ने इनकार कर दिया.

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घेरा और अंग्रेजी फ़ौजी ने पांडे को घेरा हुआ था जब उस ने ख़ुदकुशी करने की कोशिश की मगर ये कोशिश नाकाम रही. पण्डे बहुत ज़ख़्मी हुआ और इस हालात में उस को गिरफ्तार किया गया. अप्रिल ६ तारीख को पण्डे का कोर्ट मार्शल हुआ और अप्रैल ८ को बर्रकपोर में उन्हें फांसी दी गयी.



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मंगल पांडे की मौत ने काफी हिन्दुस्तानी सिपाहियों को होसला दी अपने मुल्क के लिए लड़ने की. पाण्डे की मौत ने १८५७ की भारत क्रांतिकारी को उत्साहित किया और ये हिंदुस्तान की आजादी का पहला कदम बना. आज तक मंगल पांडे की साहस और उनकी वारासात भारत भर में याद की जाती है. उनको इज्ज़त देना के लिए और उन की कुर्बानियों को याद रखने के लिए हिन्दुस्तानी डाक खान्ने ने मेल स्टाम्प बनाये है और उन पे काफी फिल्म बनाये है.






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