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Milkha Singh
Sukhdeep and Ameena

िमलखा सिंह का जन्म ८ अक्तूबर १९३५ मे लायलपुर पाकिस्तान मे हुया । यह पहले भारत का हिस्सा था । १९४७ मे भारत हिन्दुस्तान और पाकिस्तान दो हिस्सों मे वट गया ।

िमलखा सिंह ने अपनी १२ साल की उम्र मे ही बहुत दुख देखे । १९४७ के दंगों मे सिंह के माता पिता की मौत हो गई ।सिंह भी लाशों से भरी ट्रेन मे िछप कर इंडिया पहुँच । यह सिंह को उन की बहन ईशर मिली ।और यह से उन की ज़िन्दगी की नई शुरवात हुई ।
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सिंह पहले ग़लत कामों मे पड़ गये । एक वार िबना टिकट के यात्रा करते हुये पकड़े गये । उस के वाद सिंह ने िमलटरी मे भरती की कोशिश की पर िसह को तीन वार सफलता नहीं मिली । १९५२ मे बह सफल हुये । यह पहली बार िसह ने खेलो मेहिस्सा िलया ।
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हवलदार गुरदेव िसह ने उन्हे दौड़ के खेल की टरेिनग दी । १९५५ मे िसह ने पहली वार दौड़ मेहिस्सा लाया अौर दूसरे सतान पर आये । १९५८ मे अन्तरराष्ट्रीय खेल मे िसह ने २०० मीटर और ४०० मीटर की दौड़ का रिकार्ड तौडा ।


१९५६ मे िमलखा िसह ने िमलवौन की ओलंपिक मेहिस्सा िलया पर अच्छा प्रदर्शन नहीं दे पाये । १९५८ से १९६० का समय उन के करियर का सुनहरी सयम था । १९५८ टोक्यो के खेल मे िसह ने दो सोने के तकमे जीते । २०० मीटर की दौड़ २१.६ सेकेंड मे और ४०० मीटर की दौड़ ४७ सेकेंड मे पुरी की ।
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यह िसह ने पाकिस्तान के तेज दौड़ िखलाडी अब्दुल कलीक को हराया । िसह की इस रफ़्तार को देख कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने िमलखा िसह को था फ़्लाई िसह का िखताब दिया ।

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रोम ओलंपिक खेल १९६० मे िसह ने ४०० मीटर की दौड़ ४७.६ सेकेंड मे पुरी कर दूसरे सतान पर जीत पई । दूसरे राउंड ४६.५ सेकेंड मे पूरा कर दूसरा नम्बर प्राप्त किया पर फाईयल राउंड मे कुछ ग़लती की वजह से हार गये ।


वह ८० मेसा ७७ दौड़ प्रत्योगिता जीते ठे|वह १९५५ में, अपने पत्नी को श्री लंका में मिले थे उनकी शाद्दी १९६२ में हुई|उनकी निवृति के बाद उनको पंकजब का खेल संकलक बनाया गाय|उनको हेल्म्स वर्ल्ड ट्रॉफी से सम्मानित किया गया थ| उनके जीवन के ऊपर एक फिल्म बनायी गयी, भाग मिल्खा भाग जिसमे फरहान अख्तर और सोनम कपूर ने अभिनय किया थ|उनोने फिर निर्णय लिया की फिल्म के मुनाफे का १०% मिल्खा सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट मेह जाएगा|
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